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Showing posts from August 22, 2009
Extraordinary Indians: Doc who charges only Rs 2
'If you want to serve mankind, go and work among the poorest and most neglected,' Dr RavindraKoelhe, who has been serving the tribals of Melghat, Maharashtra, for 24 years, tells A GaneshNadar. Continuing our series on Extraordinary Indians. Dr RavindraKoelhe, MD, lives and runs a clinic in Melghat, Maharashtra. His fee is Rs 2 for the first consultation and Rs 1 for the second. Not only is he a doctor and social worker, Dr Koelhe has also taken the government to court for having failed in its duty to protect the Korkutribals of the region.

After completing his MBBS, he worked in Melghat for a year-and-a-half only to realise that he needed more expertise to handle the problems of the tribals. So he went back to medical college for an MD in preventive and social medicine. "I have now been here for 24 years. In those days there were two public health centres and no roads. Once a week, I used to walk 40 kms from Dharni to Bairagarh…
तालेबान का प्रभाव-नक्शे में पाक-अफ़ग़ान सीमा पर अमरीका ने तालेबान समेत चरमपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ रखा है. मुख्य संघर्ष क्षेत्र नक्शे में दिखाए गए हैं. 1234567 इस्लामिक चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा को नई फ़्रंटलाइन घोषित किया है. कुछ इलाक़ें है जिन्हें चरमपंथियों ने अपना गढ़ बना लिया है. सेना और चरमपंथियों के बीच लगातार वहाँ संघर्ष होता रहता है. प्रमुख इलाक़ों पर नज़र.



हेलमंद, चाघईहेलमंद प्रांत के दक्षिणी मैदानी इलाक़ों में अफ़ग़ानिस्तान सरकार का दबदबा कम ही रहा है. ये तालेबान का मुख्य गढ़ बनकर उभरा है. कुछ दूर पाकिस्तान सीमा पर ब्लूचीस्तान का दूरगामी नोशकी-चाघई इलाक़ा है.
अफ़ग़ान सीमा के पास बारामचा से तालेबान चरमपंथी गतिविधियाँ नियंत्रित करता है. हेलमंद में ब्रितानी सैनिकों का अड्डा है और अतिरिक्त अमरीकी सैनिकों को भी यहाँ तैनात किया गया है.

कंधार, क्वेटाकंधार को तालेबानी लहर का आध्यात्मिक गढ़ माना जाता है. तालेबान नेता मुल्ला उमर ने इसे मुख्यालय बनाया था जब 1996 में तालेबान सत्ता में आई थी. लादेन समेत अल क़ायदा के नेता भी इसी जगह को तरजीह …
विदेश नीति में आर्थिक विकास की भूमिका वंदना
बीबीसी संवाददाता, लंदन भारत के प्रति बड़े देशों की विदेश नीति में अहम बदलाव आए हैंपिछले कुछ समय कई बड़े देशों के नेताओं ने भारत का दौरा किया है. फ़रवरी, 2006 में फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने भारत का दौरा किया, मार्च 2006 में अमरीकी राष्ट्रपति बुश भारत आए और फिर मार्च में ही रूसी प्रधानमंत्री भी भारत पहुँचे. पिछले कुछ समय से भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी गहमागहमी रही है. अगर पिछले कुछ सालों में भारत के प्रति अमरीका और फ़्रांस जैसे दूसरे देशों की विदेश नीति पर नज़र डालें तो इसमें बड़ा बदलाव नज़र आया है. भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्य पहलू फ़्रांस और अमरीका ने भारत के साथ परमाणु समझौतों पर हस्ताक्षर किए. दोनों देशों के नेताओं से साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आए जिसमें मुख्य तौर पर बड़े उद्योगपति और व्यापार से जुड़े लोग थे. तो आख़िर क्या वजह है भारत को लेकर बढ़ी इस हलचल की- ख़ासकर भारत से आर्थिक रिश्ते मज़बूत करने को लेकर.  विदेश नीति के निर्माण में जो समीकरण काम करते हैं, उनमें अर्थशास्त्र का गणित काफ़ी अहम हो गया है.
तेंजिंदर खन्न…